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फà¥à¤² कà¥à¤°à¥€à¤® दूध की जगह सà¥à¤•िमà¥à¤¡ मिलà¥à¤• लेने लगे हैं. पà¥à¤°à¥‹à¤Ÿà¥€à¤¨ की कमी पूरी करने के लिठबाज़ार से तरह-तरह के पà¥à¤°à¥‹à¤Ÿà¥€à¤¨ बार, पà¥à¤°à¥‹à¤Ÿà¥€à¤¨ बॉलà¥à¤¸, दालों के सूप लेने लगे हैं.
सà¥à¤ªà¤·à¥à¤Ÿ है कि दà¥à¤¨à¤¿à¤¯à¤¾ à¤à¤° में लोग पà¥à¤°à¥‹à¤Ÿà¥€à¤¨ के रेडीमेड पà¥à¤°à¥‹à¤¡à¤•à¥à¤Ÿ ख़ूब ख़रीद और खा रहे हैं.
à¤à¤¸à¤¾ इसलिठकà¥à¤¯à¥‹à¤‚कि हमें लगता है कि सà¥à¤µà¤¸à¥à¤¥ रहने के लिठअधिक पà¥à¤°à¥‹à¤Ÿà¥€à¤¨ ज़रूरी है. लेकिन जानकार इसे ग़ैर-ज़रूरी और पैसे की बरà¥à¤¬à¤¾à¤¦à¥€ क़रार देते हैं.
उनका मानना है कि शरीर में पà¥à¤°à¥‹à¤Ÿà¥€à¤¨ की ज़रूरत कोशिकाओं की मरमà¥à¤®à¤¤ और नई कोशिकाà¤à¤ बनाने के लिठहोती है. पà¥à¤°à¥‹à¤Ÿà¥€à¤¨ वाले खाने जैसे अंडा, मछली, डेयरी पà¥à¤°à¥‹à¤¡à¤•à¥à¤Ÿ, फलियां पेट में जाने के बाद अमीनो à¤à¤¸à¤¿à¤¡ पैदा करती हैं, जिसे पेट की छोटी आंत चूस लेती है.
फिर लिवर उन अमीनो à¤à¤¸à¤¿à¤¡ में से शरीर के लिठज़रूरी अमीनो à¤à¤¸à¤¿à¤¡ को पहचान कर अलग कर लेता है और बाक़ी पेशाब के रासà¥à¤¤à¥‡ बाहर निकल जाते हैं.
जो लोग ज़à¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ मेहनत का काम नहीं करते हैं, उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ अपने वज़न के पà¥à¤°à¤¤à¤¿ किलोगà¥à¤°à¤¾à¤® के हिसाब से हर रोज़ 0.75 गà¥à¤°à¤¾à¤® पà¥à¤°à¥‹à¤Ÿà¥€à¤¨ लेना चाहिà¤. à¤à¤• पà¥à¤°à¥à¤· को कम से कम 55 गà¥à¤°à¤¾à¤® और महिला को 45 गà¥à¤°à¤¾à¤® पà¥à¤°à¥‹à¤Ÿà¥€à¤¨ रोज़ खाना चाहिà¤.
पà¥à¤°à¥‹à¤Ÿà¥€à¤¨ की कमी के चलते तà¥à¤µà¤šà¤¾ फटी-फटी-सी हो सकती है. बाल à¤à¤¡à¤¼à¤¨à¥‡ शà¥à¤°à¥‚ हो सकते हैं. वज़न कम हो सकता है.
वà¥à¤¯à¤¾à¤¯à¤¾à¤® करने वालों के लिठपà¥à¤°à¥‹à¤Ÿà¥€à¤¨ ज़रूरी
आजकल लोगों को खास तौर से यà¥à¤µà¤•ों को बॉडी बिलà¥à¤¡à¤¿à¤‚ग का बहà¥à¤¤ शौक़ है. उनके लिठज़à¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ मातà¥à¤°à¤¾ में पà¥à¤°à¥‹à¤Ÿà¥€à¤¨ खाना आवशà¥à¤¯à¤• है, कà¥à¤¯à¥‹à¤‚कि पà¥à¤°à¥‹à¤Ÿà¥€à¤¨ मांसपेशियां बनाने का काम करता है.
जो लोग ज़à¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ मेहनतवाली à¤à¤•à¥à¤¸à¤°à¤¸à¤¾à¤‡à¤œà¤¼ करते हैं उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ तो वरà¥à¤•आउट के तà¥à¤°à¤‚त बाद ही पà¥à¤°à¥‹à¤Ÿà¥€à¤¨ लेना ज़रूरी है. इसीलिठजिम करने वाले लोगों को पà¥à¤°à¥‹à¤Ÿà¥€à¤¨ के सपà¥à¤²à¥€à¤®à¥‡à¤‚ट जैसे पà¥à¤°à¥‹à¤Ÿà¥€à¤¨ शेक, उबले हà¥à¤ अंडे या पनीर खाने को कहा जाता है.
जब टà¥à¤°à¥‡à¤¨à¤¿à¤‚ग सखà¥à¤¤ होने लगती है तब ये सपà¥à¤²à¥€à¤®à¥‡à¤‚ट अपना काम करते हैं. हालांकि रिसरà¥à¤š में ये दावा à¤à¥€ पूरी तरह सही साबित नहीं हà¥à¤† है. पà¥à¤°à¥‹à¤Ÿà¥€à¤¨ का उचित लाठलेने के लिठकारà¥à¤¬à¥‹à¤¹à¤¾à¤‡à¤¡à¥à¤°à¥‡à¤Ÿ का लेना à¤à¥€ ज़रूरी है.
यूनिवरà¥à¤¸à¤¿à¤Ÿà¥€ ऑफ़ सà¥à¤Ÿà¤°à¤²à¤¿à¤‚ग में सà¥à¤ªà¥‹à¤°à¥à¤Ÿ के पà¥à¤°à¥‹à¤«à¤¼à¥‡à¤¸à¤° केविन टिपटोन कहते हैं कि खिलाड़ियों और नियम से जिम करनेवालों के लिठपà¥à¤°à¥‹à¤Ÿà¥€à¤¨ लेना ज़रूरी है लेकिन इसके लिठसपà¥à¤²à¥€à¤®à¥‡à¤‚ट की ज़रूरत नहीं. घर में बनने वाले खाने से à¤à¥€ इसकी à¤à¤°à¤ªà¤¾à¤ˆ की जा सकती है.
हालांकि इसके कà¥à¤› अपवाद à¤à¥€ हैं. जैसे कà¥à¤› खेल à¤à¤¸à¥‡ हैं, जिनमें खिलाड़ी को फिट रहने के लिठज़à¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ पà¥à¤°à¥‹à¤Ÿà¥€à¤¨ लेना शरीर की आवशà¥à¤¯à¤•ता है. इसे घर के खाने से पूरा नहीं किया जा सकता और à¤à¤¸à¥‡ में सपà¥à¤²à¥€à¤®à¥‡à¤‚ट ज़रूरी हो जाते है.
पà¥à¤°à¥‹à¤Ÿà¥€à¤¨ मिकà¥à¤¸
आम लोगों में ज़à¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ पà¥à¤°à¥‹à¤Ÿà¥€à¤¨ की ज़रूरत बà¥à¤œà¤¼à¥à¤°à¥à¤—ों को होती है. कà¥à¤¯à¥‹à¤‚कि उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ अपनी मांसपेशियां मज़बूत रखनी हैं. लेकिन अकà¥à¤¸à¤° बढ़ती उमà¥à¤° के साथ बà¥à¤œà¤¼à¥à¤°à¥à¤—ों का सà¥à¤µà¤¾à¤¦ बदलने लगता है. वो मीठा ज़à¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ खाने लगते हैं.
जानकारों के मà¥à¤¤à¤¾à¤¬à¤¿à¤•़ बà¥à¤œà¤¼à¥à¤°à¥à¤—ों को शरीर के वज़न के अनà¥à¤¸à¤¾à¤° 1.2 गà¥à¤°à¤¾à¤® पà¥à¤°à¤¤à¤¿ किलो पà¥à¤°à¥‹à¤Ÿà¥€à¤¨ लेना चाहिà¤. लेकिन कà¥à¤› आहार विशेषजà¥à¤žà¥‹à¤‚ का कहना है कि ज़à¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ पà¥à¤°à¥‹à¤Ÿà¥€à¤¨ गà¥à¤°à¥à¤¦à¥‹à¤‚ और हडà¥à¤¡à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ को नà¥à¤•़सान पहà¥à¤‚चा सकता है.
पà¥à¤°à¥‹à¤Ÿà¥€à¤¨ सपà¥à¤²à¥€à¤®à¥‡à¤‚ट खाने में कोई बà¥à¤°à¤¾à¤ˆ नहीं है. लेकिन दिकà¥à¤•़त ये है कि इनमें फ़ोडमेपà¥à¤¸ नाम के कारà¥à¤¬à¥‹à¤¹à¤¾à¤ˆà¤¡à¥à¤°à¥‡à¤Ÿ की मातà¥à¤°à¤¾ ज़à¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ होती है जिसकी वजह से गैस, पेट में दरà¥à¤¦ और अपच की परेशानी पैदा हो सकती है.
साथ ही इनमें चीनी मिली होती है जो किसी à¤à¥€ लिहाज़ से सेहत के लिठउचित नहीं है. लिहाज़ा अगर कोई à¤à¥€ पà¥à¤°à¥‹à¤Ÿà¥€à¤¨ सपà¥à¤²à¥€à¤®à¥‡à¤‚ट लें तो उस पर लिखी जानकारी धà¥à¤¯à¤¾à¤¨ से ज़रूर पढ़ लें.
माना जाता है कि पà¥à¤°à¥‹à¤Ÿà¥€à¤¨, शरीर का वज़न कम करने में मददगार होता है. पà¥à¤°à¥‹à¤Ÿà¥€à¤¨ खाने के बाद पेट à¤à¤°à¤¾ रहता है और लंबे समय तक à¤à¥‚ख नहीं लगती है. जिसके चलते बेवजह की कैलरी शरीर में नहीं पहà¥à¤‚चतीं.
पà¥à¤°à¥‹à¤Ÿà¥€à¤¨ मिकà¥à¤¸
जानकार कहते हैं कि अगर आप वज़न कम करना चाहते हैं तो हाई-पà¥à¤°à¥‹à¤Ÿà¥€à¤¨ वाला नाशà¥à¤¤à¤¾ करना चाहिà¤. वहीं कà¥à¤› जानकार ये à¤à¥€ कहते हैं कि खाने से कारà¥à¤¬à¥‹à¤¹à¤¾à¤‡à¤¡à¥à¤°à¥‡à¤Ÿ पूरी तरह हटा देने से हमारी आंतों की सेहत बिगड़ जाती है. और पूरे शरीर की सेहत ठीक रखने के लिठआंत को दà¥à¤°à¥à¤¸à¥à¤¤ रखना बहà¥à¤¤ ज़à¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ ज़रूरी है.
मोटापे के शिकार लोग कारà¥à¤¬à¥‹à¤¹à¤¾à¤‡à¤¡à¥à¤°à¥‡à¤Ÿ कम करके ज़à¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ पà¥à¤°à¥‹à¤Ÿà¥€à¤¨ खाने लगते हैं. मिसाल के लिठइनके खाने में 30 फ़ीसदी पà¥à¤°à¥‹à¤Ÿà¥€à¤¨, 40 फ़ीसदी कारà¥à¤¬à¥‹à¤¹à¤¾à¤‡à¤¡à¥à¤°à¥‡à¤Ÿ और 30 फ़ीसदी वसा होती है.
जबकि सामानà¥à¤¯ वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿ के खाने में 15 फ़ीसदी पà¥à¤°à¥‹à¤Ÿà¥€à¤¨, 55 फीसदी कारà¥à¤¬à¥‹à¤¹à¤¾à¤‡à¤¡à¥à¤°à¥‡à¤Ÿ और 30 फ़ीसदी वसा होती है.
अगर आप वाक़ई वज़न कम करना चाहते हैं तो महज़ पà¥à¤°à¥‹à¤Ÿà¥€à¤¨ ज़à¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ खाने से ये काम नहीं होगा. इसके लिठहलà¥à¤•े मांस का पà¥à¤°à¥‹à¤Ÿà¥€à¤¨ à¤à¥€ लिया जा सकता है.
सà¥à¤Ÿà¤¡à¥€ तो ये à¤à¥€ बताती हैं कि पà¥à¤°à¥‹à¤Ÿà¥€à¤¨ के लिठज़à¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ मातà¥à¤°à¤¾ में जानवरों का मांस खाना à¤à¥€ नà¥à¤•़सानदेह हो सकता है. इससे वज़न à¤à¥€ बढ़ता है, ख़ासतौर से रेड मीट तो कैंसर और हà¥à¤°à¤¦à¤¯à¤°à¥‹à¤— पैदा करने के मà¥à¤–à¥à¤¯ कारकों में से à¤à¤• हो सकता है.
हालांकि ज़à¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ पà¥à¤°à¥‹à¤Ÿà¥€à¤¨ का सेवन बà¥à¤°à¤¾ नहीं है. इसके नकारातà¥à¤®à¤• पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µ काफ़ी कम हैं.
लेकिन बड़ा नà¥à¤•़सान ये है कि जो लोग ज़à¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ पà¥à¤°à¥‹à¤Ÿà¥€à¤¨ खाने के लालच में महंगे सपà¥à¤²à¥€à¤®à¥‡à¤‚ट ख़रीदते हैं. वो इसके लिठअपनी जेब पर बेवजह का à¤à¤¾à¤° डालते हैं, जबकि शरीर की ज़रूरत से ज़à¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ खाया पà¥à¤°à¥‹à¤Ÿà¥€à¤¨, शौचालय में बह जाता है.
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